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LPG Cylinder Rate 2026 : फिर बढ़ेंगे सिलेंडर के दाम? महीने की पहली तारीख से पहले सामने आई ये बड़ी वजह

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महीना खत्म होने को आता है और जैसे ही कैलेंडर की पहली तारीख नजदीक आती है, देश के आम परिवारों और छोटे कारोबारियों की नजरें रसोई गैस के नए रेट कार्ड पर टिक जाती हैं। सवाल सीधा और बेहद संवेदनशील होता है: क्या इस बार गैस सिलेंडर और महंगा होने जा रहा है, या फिर कुछ राहत मिलेगी? साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार के उतार-चढ़ाव ने इस सवाल को और भी गंभीर बना दिया है।

2026 में दामों का हाल: कब क्या घटा और क्या बढ़ा?

साल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक एलपीजी कीमतों में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं:

  1. साल की पहली छमाही (शुरुआती तेजी): साल के शुरुआती महीनों (मार्च से मई 2026) में मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम रिकॉर्ड स्तर तक चढ़ गए थे। मई-जून 2026 के दौरान दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर ₹3,100 के पार पहुँच गया था।
  2. जुलाई-अगस्त 2026 की बड़ी राहत: इसके बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने लगातार दो महीनों में भारी कटौती की। अकेले 1 जुलाई 2026 को 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर में ₹183.50 की बड़ी राहत दी गई, जिससे दिल्ली में इसका भाव ₹2,930 पर आया और अगस्त में यह और घटकर ₹2,738 तक पहुँच गया।
  3. सितंबर 2026 का ताज़ा संशोधन (हल्की बढ़ोतरी): 1 सितंबर 2026 को तेल कंपनियों ने लगातार दो महीनों की कटौती के बाद पहली बार कमर्शियल गैस में मामूली बढ़ोतरी की। दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर ₹9.50 बढ़कर ₹2,747.50 हो गया, जबकि कोलकाता में यह ₹11.50 की तेजी के साथ ₹2,884 तक पहुँच गया।
  4. घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) की स्थिति: राहत भरी बात यह है कि घरेलू 14.2 किलोग्राम रसोई गैस की कीमतों में कंपनियों ने लगातार स्थिरता बनाए रखी है। वर्तमान में दिल्ली में घरेलू सिलेंडर ₹942, मुंबई में ₹941.50, चेन्नई में ₹957.50 और कोलकाता में ₹968 के स्तर पर बना हुआ है।

मेट्रो शहरों में ताज़ा भाव (सितंबर 2026 स्थिति)

शहरघरेलू सिलेंडर (14.2 kg)कमर्शियल सिलेंडर (19 kg)1 सितंबर का बदलाव (कमर्शियल)
नई दिल्ली₹942.00₹2,747.50+₹9.50 बढ़ा
मुंबई₹941.50₹2,701.00+₹9.50 बढ़ा
कोलकाता₹968.00₹2,884.00+₹11.50 बढ़ा
चेन्नई₹957.50₹2,916.50+₹10.50 बढ़ा
पटना₹1,031.50₹3,029.00+₹11.00 बढ़ा

(नोट: स्थानीय वैट और परिवहन भाड़े के कारण अलग-अलग राज्यों और ज़िलों में कुछ रुपयों का अंतर हो सकता है।)

क्यों लग रहे हैं आगे और दाम बढ़ने के कयास? 3 बड़ी वजहें

अगर आने वाली पहली तारीख को कीमतें फिर ऊपर जाने की चर्चा है, तो उसके पीछे कोई अफवाह नहीं बल्कि ठोस वैश्विक और भू-राजनीतिक कारण हैं:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और मिडिल ईस्ट तनाव: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% एलपीजी आयात इसी समुद्री मार्ग के जरिए करता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और जहाजों की आवाजाही पर बने जोखिम के चलते शिपिंग और इंश्योरेंस लागत आसमान छू रही है।
  • कच्चे तेल और अंतरराष्ट्रीय सीपी (Contract Price) में उछाल: वैश्विक बेंचमार्क क्रूड ऑयल (ब्रेंट क्रूड) लगातार ऊंचे स्तरों ($85-$90 प्रति बैरल) पर बना हुआ है। सऊदी अरामको द्वारा तय होने वाले एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में तेजी का सीधा असर भारतीय कंपनियों की खरीद लागत पर पड़ता है।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये का दबाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस का भुगतान डॉलर में किया जाता है। रुपये में किसी भी तरह की कमजोरी आयात बिल को बढ़ा देती है, जिसे तेल कंपनियों को अंततः कीमतों में समायोजित करना पड़ता है।

घरेलू रसोई पर क्या असर होगा?

यह समझना जरूरी है कि जब भी पहली तारीख को ‘दाम बढ़े’ की खबर आती है, तो उसका 95% असर 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर पर ही होता है, जिसका असर ढाबों, कैंटीन और रेस्टोरेंट के बिल पर पड़ता है।

घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर के मामले में केंद्र सरकार और तेल कंपनियां आम जनता के बजट को ध्यान में रखते हुए सीधी बढ़ोतरी से बचती हैं और नुकसान का बड़ा हिस्सा खुद संभालती हैं। इसलिए आम परिवारों को किसी घबराहट में आने की जरूरत नहीं है; हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और लंबा खिंचता है, तो दबाव कमर्शियल सेगमेंट पर और गहरा सकता है। आधिकारिक पुष्टि के लिए हमेशा इंडियन ऑयल (IOCL) के आधिकारिक पोर्टल की दरों पर ही भरोसा करें।

For Feedback - patidarpatidar338@gmail.com

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