मध्य प्रदेश में कुछ दिनों की सुस्ती के बाद मानसून ने फिर से जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। अरब सागर से आ रही नमी और बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती सिस्टम ने मिलकर प्रदेश के ऊपर एक मजबूत वेदर टर्फ बना दिया है। मौसम केंद्र ने कल के लिए प्रदेश के 28 जिलों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट घोषित किया है। राहत और आफत की यह दोहरी स्थिति लगभग 9 तारीख तक लगातार बनी रहने वाली है, जिससे मालवा-निमाड़ सहित पश्चिमी और मध्य क्षेत्र पूरी तरह तरबतर होंगे।
मालवा बेल्ट में सक्रिय होगा मुख्य दौर इस नए चक्रवात का सीधा केंद्र पश्चिमी मध्य प्रदेश बनता दिख रहा है।
- रतलाम, मंदसौर और नीमच: इन तीनों जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के भीतर बादलों की तूफानी गर्जना के साथ तेज बारिश की संभावना है। निचले रिहायशी इलाकों और ग्रामीण रास्तों पर पानी भरने के पूरे आसार हैं।
- इंदौर-उज्जैन संभाग: इंदौर, देवास, धार और आगर-मालवा में हल्की से मध्यम झड़ी के बीच रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर चलेगा। तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट के साथ उमस से पूरी राहत मिलेगी।
28 जिलों का दायरा: कहां कैसा दिखेगा असर? मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बारिश का वितरण पूरे प्रदेश में अलग-अलग तीव्रता के साथ नजर आएगा:
- भारी से अति-भारी बारिश (रेड व ऑरेंज प्रभाव): रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ, धार, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर और आगर-मालवा।
- लगातार झमाझम व गरज-चमक: भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, गुना, शिवपुरी और अशोकनगर।
- मध्यम से तेज बौछारें: नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और आसपास के पूर्वी-मध्य जिले।
सिस्टम 9 तारीख तक क्यों रहेगा ताकतवर? हवा के ऊपरी भाग में बना चक्रवाती दबाव मध्य भारत से होकर पश्चिमी दिशा की ओर खिसक रहा है। दोनों समुद्रों से लगातार आ रहे बादलों के जत्थे को मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति रोक रही है। इसी वजह से यह सिस्टम सिर्फ एक दिन बरसकर थमने वाला नहीं है, बल्कि 9 तारीख तक मालवा और मध्य क्षेत्र के जलस्रोतों को भरपूर रिचार्ज करेगा।
जमीनी स्तर पर क्या बरतें सावधानी?
- जलस्रोतों से सतर्कता: शिवना, चंबल, माही और छोटी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। रपटों और जलमग्न पुलियों को पार करने का जोखिम कतई न उठाएं।
- खेतों में जलनिकासी: सोयाबीन, उड़द और मक्का जैसी फसलों के खेतों में पानी ज्यादा देर न ठहरे, इसके लिए किसान भाई जल निकासी की नालियों को तुरंत साफ रखें।
- आकाशीय बिजली से बचाव: बादलों की गर्जना और बिजली कड़कने के दौरान खुले खेतों, मोबाइल टॉवर और ऊंचे पेड़ों की छांव में खड़े होने से बचें। पक्के मकानों में शरण लें।
मालवा और मध्य एमपी के लोगों को अगले तीन-चार दिन छाते और रेनकोट साथ रखकर ही सफर की योजना बनानी चाहिए, क्योंकि मौसम किसी भी पल करवट ले सकता है।





